औरंगाबाद दुर्घटना..
एक तम्मना थी मन में, घर वापस जाने की
एक जरूरत थी तन की, रोज़ी रोटी पाने की
दिन धूप की मेहनत और मीलों चलकर आने की थकान
सोचा थोड़ा सुस्ता लूं अपने नंगे पैरों को वहीं
पर किसे थी खबर ऐसी अनहोनी हो जाने की
*औरंगाबाद दुर्घटना*
एक जरूरत थी तन की, रोज़ी रोटी पाने की
दिन धूप की मेहनत और मीलों चलकर आने की थकान
सोचा थोड़ा सुस्ता लूं अपने नंगे पैरों को वहीं
पर किसे थी खबर ऐसी अनहोनी हो जाने की
*औरंगाबाद दुर्घटना*

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